अनबन - लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi
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अनबन - लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

आपकी बहू तो बहुत प्यारी है गुड़िया जैसी सुंदर कहां से ढूंढ कर लाए हैं ये हीरे की कनी .. जो भी आता बहू मीनल की मुग्ध कंठ से प्रशंसा करता ।

मनोहर जी और सुमित्रा बहुत गदगद हो रहे थे।

घर की बैठक में विशाल नए सोफे पर मीनल को बिठा दिया गया था ।मुंहदिखाई की रस्म हो रही थी।पूरा खानदान इकठ्ठा था।प्रत्येक का परिचय भी नई बहू से करवाया जा रहा था।

सब कुछ बढ़िया चल रहा था एक ही बात मनोहर जी सहित सभी की #आँखों में खटक रही थी कि उनका बेटा आदित्य बहू की बगल बैठने से कतरा रहा था।मीनल भी उसे देख कर सिकुड़ सी जाती थी।

सुमित्रा से चर्चा करके मनोहर जी बेटे के पास गए जो अपने स्टडी कक्ष में जाकर बैठ गया था।

क्या बात है आदित्य तेरे और बहू के बीच कुछ अनबन सी दिख रही है ।उसके साथ क्यों नहीं बैठ रहा है ।सबकी आंखों में ये बात खटक रही है सारे रिश्तेदार बातें बनाने लगेंगे बेटा मनोहर जी ने मृदुल स्वर में पूछा।

पापा आप अपने पसंद की बहू लाए हैं ना तो आप ही बैठिए उसके बगल में ।मुझे नहीं बैठना आदित्य के दिल का गुबार फट पड़ा था।

कैसी बात कर रहा है।आखिर तुझेक्या कमी दिख रही है इस मासूम बच्ची में मनोहर जी आहत स्वर में बोल उठे।

बहुत कम पढ़ी लिखी है पापा ये आपकी मासूम बच्ची।मेरे स्तर की नहीं है मैं इतना पढ़ा लिखा हूं मेरे सभी दोस्त भी उच्च शिक्षित है ये उन सबके बीच उठने बैठने लायक ही नहीं है आप लोग अपने शौक पूरे करिए ।

आदित्य मत भूल वह तेरी पत्नी है।इस घर से हम लोगों से उसका संबंध सिर्फ तेरे कारण है।तुझे सब कुछ मालूम था उसके बारे में।फिर हामी क्यों भरी थी तूने।

आप लोग तो लट्टू हुए जा रहे थे मेरी कभी कोई सुनता है इस घर में आदित्य आक्रोशित था।

आदित्य सुन क्या पढ़ाई लिखाई के अलावा और भी कोई कमी तुझे मीनल में नजर आई है मनोहर जी ने गंभीरता से पूछा।

नहीं .. और तो कोई कमी नहीं है पर… अटकते हुए आदित्य बोल उठा।

बेटा मीनल अनपढ़ नहीं है सिर्फ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है।क्योंकि उसके घर के हालात बिगड़ गए थे।पढ़ाई तो किसी भी उम्र में की जा सकती है।तूने उससे बात की ,पूछा क्या वह आगे पढ़ना चाहती है।मुझे पूरा विश्वास है अगर तुम उसे प्रेरित करोगे तो ये कमी दूर हो सकती है। वह जरूर मान जाएगी मनोहर जी दृढ़ थे।

पापा मैने तो गुस्से के मारे में उससे कोई बात ही नहीं की ।ये तो मैने सोचा ही नहीं था कि उसकी इस कमी के लिए वह जिम्मेदार नहीं है।और उसकी यह कमी अभी पूरी की जा सकती है।लेकिन मैं कैसे पूछूं हिचकिचाहट थी आदित्य के स्वर में।

अभी पूछ लो मैं बुलाता हूं मनोहर जी दोनों के बीच का वैमनस्य समय रहते दूर करने को प्रतिबद्ध थे।

मीनल बेटा क्या तुम आगे पढ़ना चाहती हो मनोहर जी ने उसके आते ही पूछा तो पहले तो मीनल विस्मित हो गई ..फिर रोने लगी।

पापा जी आपने मेरे दिल की बात कह दी ।मैं बहुत पढ़ना चाहती थी लेकिन मेरे घर की आर्थिक तंगी के कारण मेरी पढ़ाई बीच में छुड़ा कर मुझे कॉलेज नहीं भेजा गया था इस बात का मुझे हमेशा अफसोस रहता है दुखी स्वर था उसका।

मीनल..अब कोई अफसोस नहीं करना तुम जितना चाहोगी उतना पढ़ना ।मै इस काम में तुम्हारी पूरी सहायता करूंगा और साथ दूंगा आदित्य ने आगे बढ़कर स्नेह से उसका हाथ थामते हुए कहा और उसके साथ बैठक कक्ष की तरफ बढ़ गया।

अब मनोहर जी सहित सभी की आंखों में दोनों को एक साथ बैठा देख आशीर्वाद की बदली घुमड़ रही थी और मीनल के मन में कृतज्ञता और सम्मान की बारिश।

लतिका श्रीवास्तव

आंखों में खटकना#मुहावरा आधारित लघुकथा


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