इमरान नाम का एक लड़का था — भोला, सीधा और दिल का बहुत अच्छा, लेकिन पढ़ाई में बहुत कमजोर। पाँचवीं कक्षा के बाद से ही हर साल मुश्किल से पास होता। घरवालों और दोस्तों ने कहना शुरू कर दिया था,
“इससे कुछ नहीं होगा। ये तो बस नमाज़ पढ़ ले, यही काफ़ी है।”
इमरान के अंदर एक अजीब-सी हताशा भर गई थी।
लेकिन एक दिन, जब वो मस्जिद के कोने में बैठा उदास था, तभी वहाँ के बुजुर्ग मौलवी साहब हाफ़िज़ अब्दुल करीम उसके पास आए। उन्होंने प्यार से पूछा,
“बेटा, इतना मायूस क्यों बैठा है?”
इमरान ने रोते हुए कहा,
“मौलवी साहब, मैं कुछ नहीं कर सकता। मुझे कुछ समझ में नहीं आता, सब कहते हैं मैं नाकाम हूँ।”
मौलवी साहब ने मुस्कुराकर कहा,
“बेटा, जब अल्लाह ने तुझे बनाया है, तो तुझमें भी कुछ ख़ास रखा है।
तुझे बस उस चीज़ को पहचानना है।
और वो रास्ता क़ुरआन सिखाता है।”
इमरान ने धीरे से पूछा,
“कुरआन तो मैं सिर्फ़ नमाज़ में सुनता हूँ, उसमें ऐसा क्या है मौलवी साहब?”
मौलवी साहब बोले,
“कुरआन सिर्फ़ इबादत का नहीं, ज़िन्दगी का इल्म है।
उसमें इंसान की अकल को रोशन करने की ताक़त है।
जब कोई रोज़ उसका तिलावत करता है, समझता है,
तो उसके सीने में नूर उतरता है —
वो नूर इंसान को कमज़ोरी से निकालकर ऊँचाई तक पहुंचा देता है।”
इमरान का सफ़र
उस दिन के बाद इमरान ने ठान लिया कि वो रोज़ क़ुरआन सीखेगा — न सिर्फ़ पढ़ेगा, बल्कि समझेगा।
हर सुबह नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद वो मौलवी साहब के पास जाता, आयतों का मतलब सीखता, सवाल पूछता, और अरबी तर्जुमे के साथ लिखता।
शुरू में बहुत मुश्किल था। अक्षरों के सही उच्चारण तक में पसीना आ जाता।
लेकिन धीरे-धीरे, क़ुरआन की आयतों ने उसका दिल और दिमाग दोनों बदल दिए।
वो मेहनती बन गया, एकाग्रता बढ़ने लगी, और पढ़ाई में उसका ज़हन खुलने लगा।
कामयाबी की मंज़िल
जब इमरान ने दसवीं में फ़र्स्ट डिवीज़न हासिल किया, तो पूरे स्कूल ने तालियाँ बजाईं।
कॉलेज पहुँचा तो उसने साइंस को अपना विषय चुना।
धीरे-धीरे उसने उच्च शिक्षा के लिए रिसर्च शुरू की —
और एक दिन, वो एक मशहूर इस्लामी वैज्ञानिक बना जिसने ऊर्जा स्रोतों और पर्यावरण पर अहम काम किया।
जब किसी ने उससे पूछा,
“इमरान भाई, आपकी कामयाबी का राज़ क्या है?”
तो वो मुस्कुरा कर बोला,
“मेरे रिज़्क़ का, मेरे इल्म का और मेरी सोच का हर दरवाज़ा क़ुरआन की बरकत से खुला है।
क़ुरआन ने मुझे सिखाया कि अगर इरादा सच्चा हो,
तो अल्लाह रहनुमाई ज़रूर देता है।”
प्रेरणा
आज इमरान दुनिया के कई मुस्लिम युवा छात्रों के लिए प्रेरणा है।
वो हर मजलिस में यही कहता है,
“भाइयों, अपनी किताब को सिर्फ़ दीवार पर सजाकर मत रखो,
उसे दिल में उतारो।
कुरआन वो ताक़त है जो अँधेरी ज़िन्दगी में रोशनी ला देती है।”
कहानी का संदेश
हर मुसलमान के भीतर एक रोशनी है —
लेकिन उस रोशनी को जगाने के लिए क़ुरआन की समझ और अमल ज़रूरी है।
अगर हम रोज़ एक आयत भी सच्चे दिल से समझें,
तो ज़िन्दगी का हर दरवाज़ा खुलने लगता है।
क़ुरआन न सिर्फ़ इबादत की किताब है,
बल्कि इल्म, हिम्मत और इंसानियत की सबसे बड़ी रहनुमा है।
.webp)